शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

तुम्हारा आलौकिक साथ !


स्नेह को कभी समझा ही नहीं जा सकता
बस उसकी उठती रश्मियों को 
आत्मा तक महसूस किया जा सकता हैं .

ये कैसा साथ है तुम्हारा !

जो हर पल, हर शब्द मेरा साथ देता भी है
 और किसी को महसूस नहीं होने देता हैं |

बावरी हूँ मैं तुम्हारी.

कितनी उमंगें उठा देते हैं तुमहारे ये शब्द ,

जीने की एक नयी अदा देते हैं ,
बेजान पड़ी इस जिन्दगीं में ,

ये ही मेरा सत्य हैं, आनंद है  |
तुम्हारा आलौकिक साथ !

-- अनुभूति 

8 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

खूबसूरत शब्द और उतने ही खूबसूरत भाव...अप्रतिम रचना...बधाई स्वीकारें...


नीरज

laxmi chouhan ने कहा…

धन्यवाद |

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

sundar bhav, seemit shabdon mai behtar

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

AlbelaKhatri.com ने कहा…

waah !

ati sundar kaavya...........

kunwarji's ने कहा…

khubsurat bhaav...

kunwar ji,

Harman ने कहा…

very nice..

mere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
Lyrics Mantra

Ravindra Ravi ने कहा…

एक अलौकिक रचना!

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

कितनी उमंगें उठादेते हैं तुम्हारें ये शब्द ,
जीने की एक नयी अदा देते हैं बेजान पड़ी इस जिन्दगीं में ,

bhaavpoorn sundar rachna
aabhaar