शनिवार, 24 जुलाई 2010

तुम्हारे वादे ,

तुम्हारे वादे , 

एक आस जिन्दगी की ,और
तुम्हारे वादे ,

जिन्दगी का फलसफा यही है,
तुम्हारे वादे .

तुम्हारे स्वप्न सुकून देते हैं
 और , तुम्हारा साथ वेदना .

एक डर , 
हाँ एक डर 
मुझे हर पल सताता हैं ,
कि कही तुम, मुझसे बिछड़ ना जाओ |

तुम्हारे इन वादों पे यकीन करना,
तो जिन्दगी चाहती हैं .

पर हर आने वाले पल की आहट
फिर भी मुझे डराती हैं |

तुम्हारी साँसे मुझे 
हर पल विश्वास दिलाती हैं, 
फिर भी हमनशीं  मेरे ,
ये दुनिया मुझे पल -पल डरती हैं|

क्या सत्य हैं ? 
तुम्हारी सांसे या 
तुम्हारे वादे ?

इसी  ख़ुशी और गम 
में  जिन्दगी बिताती हूँ |

हाँ 
फिर भी एक आस जिन्दगी की और तुम्हारे वादे !


-- अनुभूति 

4 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

तुम्हारे स्वप्न सुकून देते हैं और
तुम्हारा साथ वेदना .
शायद इसीलिये स्वप्न हमें भाते हैं
बेहतरीन अभिव्यक्ति

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

बेनामी ने कहा…

bahut hi sunder abhivyakti..
bahut acchi lgi aapki rachnayen..
kabhi waqt mile to dekhiyeg..
http://tajinindia.blogspot.com