शनिवार, 22 मई 2010

तलाश
मन ढूंढ़ रहा हैं कही तुम्हारे शब्दों को
अधूरे पड़े सवालो के जवाब देने वाले तुम क़हा हो ?
बैचेन हूँ मै , मेरी आत्मा
खामोशी से कही ना कही कुछ चल  रहा है रूहों मै
मै भी हूँ इससे बाबस्ता और तुम भी
फिर क्यों छिपे बेठे हो यूं  तुम पर्दों के पीछे ?
 जहा भी हो जवाब दो
मेरे शब्द तुम्हारे  शब्दों के अपनत्व को खोज रहे हैं
बिना किसी स्वार्थ के
बिना कुछ जाने ,पहचाने
इतना जानती हूँ रूह रूह को खोज रही हैं |

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं

BAWA ASTROLOGER ने कहा…

हर चेहरे की सुन्दरता है मुस्कान,
हर लम्हों की मधुरता है मुस्कान,
जीवन का पल -पल हो मुस्कानों की सौगात
तो ख़ुशी से कट जाएगी ये अपनी उम्र तमाम,
हर इंसां की चाहत है मुस्कान,
दिल के गहरे ज़ख्मो से राहत है मुस्कान,
हंसी दवा सब रंजो ग़मों की
हंसी दुवा है टूटे दिलो की
फूलो से है भवरे की पहचान
माँ के आँचल में बच्चो की मुस्कान,
जीवन की राहो में मुस्कानों की धारा हो,
खिले हुवे फूलों की तरह हँसता चेहरा प्यारा हो,
मुस्कान मिटा देती है हर दुःख हर चिंता की रेखा,
इस दुनिया में है वो अकेला जिसने हँसना ना सीखा,
सुख हो या दुःख, ख़ुशी हो या गम कभी नहीं घबराना है,
सुनसान डगर के अंधेरो में भी मुस्कान की ज्योत जलाना है.